सर्वप्रथम मैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जुड़े सभी बंधुओं का हार्दिक अभिनंदन करती हूं। इस महान संस्था के कुलपति की जिम्मेदारियां ग्रहण करते हुए मुझे अत्यंत गर्व है और मैं अत्यधिक आशान्वित हूं। वर्ष 1887 में स्थापित देश के चौथे सर्वाधिक प्राचीन विश्वविद्यालय के रूप में इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने देश को चिंतकों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों, प्रशासकों, लेखकों, कलाकारों और राजनीतिज्ञों से समृद्ध करने की अपनी जिम्मेदारी जारी रखी है। मुझे ऐसे विश्वविद्यालय की प्रथम महिला कुलपति के रूप में सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

मैं इस प्रतिबद्धता के साथ इस प्रतिष्ठित संस्था से जुड़ रही हूं कि मैं इस संस्था के अतीत के गौरव को बनाए रखते हुए नए समय की मांग के अनुसार इस संस्था को नई दिशाओं के पथ पर आगे ले जाऊंगी। पिछले कुछ वर्षों में आवश्यकताओ का स्वरूप बदलकर विज्ञान के क्षेत्रों में अभूतपूर्व विकास के साथ और विषयों की सीमाओं से परे उच्चतर ज्ञानार्जन की शिक्षा से अंतर्विषयक स्वरूप में परिवर्तित हो गया है। यह बदलाव नई शिक्षा नीति 2020 में व्यक्ति के लिए संसाधन सृजन के बजाय उसे समग्र विकास के पथ पर अग्रसर करने की शिक्षा से संबंधित विजन में प्रतिबिंबित होता है।

आइए हम इस संस्था को केवल प्रशासनिक संदर्भ में ही नहीं बल्कि अंतर्विषयक अनुसंधान के क्षेत्र में भी पुनः उत्कृष्टता का केंद्र बनाने के लिए आगे बढ़ते हैं। मैं आपको आश्वासन देती हूं कि मैं अपने इस विश्वविद्यालय को शिक्षा एवं विकास की ऊंचाइयों को छूने और भावी राष्ट्र निर्माताओं को तैयार करने की दिशा में दिये गए प्रस्ताव एवं प्रयास के लिए अपना पूर्ण समर्थन प्रदान करूंगी।

आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय अपने लक्ष्य में तभी सफल होगा जब छात्र न केवल अकादमिक उत्कृष्टता में बल्कि खेल, संस्कृति और कला के सह पाठ्यक्रम क्षेत्रों में भी अपनी दक्षता हासिल कर सकेंगे। हमें छात्रों के चहुमुखी विकास के लिए एक उचित वातावरण प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए । उनकी सफलता ही लोगों में हमारी संस्था के प्रति अटूट विश्वास जगाती है।

हमारे पास विश्वविद्यालय के शिक्षक के रूप में सर्वोत्तम शिक्षाविद हैं जिनके द्वारा अनुसंधान में विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता लाई गई है। हमने उन्हें बुनियादी ढांचे की सहायता प्रदान करने की कोशिश की है और हम इसमें रह गई कमी को पूरा करने के प्रयास को आगे बढ़ाएंगे ताकि उनका काम बिना रुके निर्बाध रूप में संपन्न हो सके। हमें अपना ध्यान अनुसंधान की प्रकृति के आधार को व्यापक बनाने में और इसे अंतर्विषयक एवं सामाजिक रूप से उपयोगी बनाने पर केंद्रित करना होगा।

मैं उन सभी पूर्व छात्रों के योगदान के लिए आभार व्यक्त करती हूं कि वे जहां कहीं भी गए हैं, उन्होंने अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है और विश्वविद्यालय के प्रतीक "Quot Rami tot Arbores" अर्थात जितनी अधिक शाखाएं उतने अधिक वृक्ष को सत्य साबित कर दिखाया है। मैं अपने पूर्व छात्रों से आग्रह करती हूं कि वे अपनी उस संस्था की बेहतरी के लिए जिसमें उन्होंने शिक्षा पाई हैए अपना सक्रिय समन्वय, सहयोग, परामर्श और अपने रचनात्मक सुझाव दें।

यदि विश्वविद्यालय को सफलता के अपने आयामों को व्यापक बनाने में आगे बढ़ना है तो इसके लिए छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों, अभिभावकों और जन सामान्य के साथ साथ सभी हितधारकों का योगदान और समर्थन आवश्यक है। मैं आप सभी से आग्रह करती हूं कि आप ऐसा परिवेश तैयार करने के लिए सामूहिक प्रयास करें जिसमें हमारी यह आकांक्षा साकार हो सके।

प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव
- कुलपति